हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने जताया जान का खतरा, परिवार के फोन टैपिंग और AI से फर्जी वीडियो बनाने की आशंका।
गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की चेतावनी से बढ़ी सियासी हलचल, मुख्यमंत्री और एसएसपी से शिकायत करने का किया दावा
हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश के एक बयान ने हलचल तेज कर दी है। हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई हैं। विधायक का आरोप है कि प्रदेश में एक बड़ा गैंग सक्रिय है, जो नेताओं के फोन टैप कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों के फोन भी टैप किए जा रहे हैं। सुमित हृदयेश ने अपनी जान को खतरा बताते हुए आशंका जताई कि उनकी गाड़ी का कभी भी एक्सीडेंट कराया जा सकता है और उन्हें तथा उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
विधायक के इन आरोपों के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में कई सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, फोन टैपिंग, कथित गैंग की सक्रियता और जान को खतरे से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
फोन टैपिंग को लेकर विधायक ने जताई गंभीर चिंता
कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने आरोप लगाया कि एक कथित गैंग उनके और उनके परिवार की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। उनका दावा है कि परिवार के फोन टैप किए जा रहे हैं और इस पूरे मामले में एक निजी एंटरप्राइज से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। विधायक ने यह भी आशंका जताई कि इस कथित गतिविधि में कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं।
सुमित हृदयेश के बयानों ने निजता, जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और राजनीतिक माहौल को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, आरोपों में जिन लोगों या संस्थाओं की ओर संकेत किया गया है, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
AI तकनीक से फर्जी कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो वायरल करने की आशंका
विधायक ने केवल फोन टैपिंग तक ही अपनी चिंता सीमित नहीं रखी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के दुरुपयोग की आशंका भी जताई। उनका कहना है कि उनकी आवाज के आधार पर फर्जी कॉल रिकॉर्डिंग तैयार की जा सकती है और उनके नाम से नकली वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा सकते हैं।
यदि इस तरह के आरोपों की जांच होती है, तो डिजिटल साक्ष्यों, कथित रिकॉर्डिंग और वीडियो की प्रामाणिकता की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, फर्जी रिकॉर्डिंग या वीडियो तैयार किए जाने की किसी विशिष्ट घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री से शिकायत और एसएसपी को पत्र देने का दावा
सुमित हृदयेश के मुताबिक, उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी शिकायत की थी। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि 24 अप्रैल 2025 को एसएसपी को लिखित शिकायत दी गई थी। विधायक के आरोपों के मद्देनजर अब यह सवाल उठ रहा है कि पूर्व में दी गई शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और क्या मामले में कोई जांच की गई।
यदि शिकायत पुलिस के पास दर्ज है, तो उसकी स्थिति, उपलब्ध साक्ष्यों और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आना जरूरी होगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विधायक की ओर से जताई गई आशंकाओं पर संबंधित अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं।
भावुक हुए विधायक, बोले—मुझे और मेरे बच्चों को खतरा
अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सुमित हृदयेश भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए न्याय की मांग की।
सुमित हृदयेश, कांग्रेस विधायक ने कहा:
“मेरा जीवन खतरे में है… मुझे न्याय चाहिए… मुझे और मेरे बच्चों को मार देंगे।”
विधायक के इस बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की ओर से स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर इस तरह की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका अहम हो जाती है। हालांकि, सुरक्षा संबंधी खतरे का वास्तविक स्तर संबंधित एजेंसियों के आकलन और जांच से ही स्पष्ट होगा।
गैरसैंण विधानसभा सत्र में आत्मदाह की चेतावनी
सुमित हृदयेश ने अपने बयान में कहा कि वह गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करेंगे। इस दौरान रामनगर के संजय नेगी और बाजपुर के सोनू शर्मा भी उनके साथ मौजूद रहे।
विधायक ने संजय नेगी और सोनू शर्मा को कांग्रेस में शामिल कराने की बात कहते हुए अपनी विधायकी छोड़ने तक की पेशकश की। उन्होंने कहा:
“संजय नेगी और सोनू शर्मा को कांग्रेस में जॉइन करा दो, मैं विधायकी छोड़ दूंगा।”
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि विधायक की नाराजगी के पीछे सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के साथ-साथ अन्य राजनीतिक मुद्दे भी हैं या नहीं। हालांकि, उनके बयान के अलग-अलग पहलुओं को जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उनका पूरा संदर्भ और संबंधित पक्षों का पक्ष जानना जरूरी है।
पुलिस और सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुमित हृदयेश की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों पर सरकार और पुलिस प्रशासन क्या रुख अपनाते हैं। क्या विधायक की ओर से पूर्व में दी गई शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या उनकी सुरक्षा का आकलन कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे? और क्या फोन टैपिंग तथा AI के माध्यम से कथित फर्जी सामग्री तैयार किए जाने की आशंकाओं की जांच होगी?
इन सवालों के जवाब संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान और जांच की प्रगति से ही सामने आएंगे। फिलहाल, कांग्रेस विधायक के बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
नोट: फोन टैपिंग, कथित गैंग की संलिप्तता और जान को खतरे से जुड़े आरोप फिलहाल विधायक के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस या सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
