36 सप्ताह की गर्भवती महिला के लिए वरदान बना एनपीपीएल हॉस्पिटल, डॉक्टरों के प्रयास से जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ।

0
IMG-20261019-WA0144
Spread the love

हरिद्वार। गर्भावस्था के दौरान दौरे पड़ने से गंभीर हालत में पहुंची 36 सप्ताह की गर्भवती महिला के लिए हरिद्वार स्थित एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल वरदान साबित हुआ। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। प्रसव के बाद महिला की हालत नाजुक होने पर उसे दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखकर उपचार दिया गया। चिकित्सकों के प्रयासों और निरंतर निगरानी के बाद अब मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रियंका नाम की महिला 36 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान दौरे पड़ने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच गई थी। लक्सर में प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए हरिद्वार स्थित एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल रेफर किया गया। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार की जिम्मेदारी संभाली।

यह भी पढ़ें -  कोटद्वार में 675 करोड़ से बनेगा 400 केवी विद्युत उपकेंद्र, उत्तराखंड का चौथा सबसे बड़ा उपकेंद्र होगा।

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका शाह और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आस्था सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने महिला की स्थिति का आकलन करते हुए आवश्यक उपचार किया और सुरक्षित प्रसव कराया। हालांकि, प्रसव के बाद भी महिला की हालत नाजुक बनी रही। ऐसे में उसे दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखकर गहन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

यह भी पढ़ें -  कोटद्वार के युवा उद्यमियों के साथ संवाद कार्यक्रम आज, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों पर होगी चर्चा।

चिकित्सकों की निगरानी में जच्चा-बच्चा स्वस्थ

लगातार उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी के बाद महिला की सेहत में सुधार हुआ है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, मां और नवजात दोनों की स्थिति अब स्थिर और संतोषजनक है। स्वास्थ्य में सुधार को देखते हुए आगामी एक-दो दिनों में दोनों को अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है।

यह भी पढ़ें -  अंकिता भंडारी हत्याकांड: 24 घंटे में तीनों आरोपी गिरफ्तार, 88 दिन में जांच पूरी; दोषियों को उम्रकैद।

पूरे उपचार के दौरान नहीं लिया गया कोई शुल्क

इस मामले में मानवीय पहलू भी सामने आया है। अस्पताल की ओर से महिला और उसके नवजात को पूरे उपचार के दौरान निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। गंभीर स्थिति में समय पर विशेषज्ञ उपचार, चिकित्सकों की तत्परता और गहन देखभाल से मां और बच्चे की जान बचाने में सफलता मिली।

यह मामला गंभीर गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भूमिका को रेखांकित करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page