यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में बीते एक साल में हलाला, बहुविवाह का एक भी केस नहीं,यूसीसीः समरसता और समानता का एक वर्ष।

0
Oplus_131072

Oplus_131072

Spread the love

यूसीसीः समरसता और समानता का एक वर्ष

यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में बीते एक साल में हलाला, बहुविवाह का एक भी केस नहीं

यूसीसी लागू होने के बाद प्रतिदिन हो रहे 1400 से अधिक रजिस्ट्रेशन

4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाह पंजीकरण

22 भाषाओं में उपलब्ध है यूसीसी की सेवाएं

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है, और यह वर्ष राज्य के सामाजिक, संवैधानिक और प्रशासनिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने यूसीसी को धरातल पर उतारकर न केवल संविधान की भावना को साकार किया, बल्कि समानता से समरसता की दिशा में पूरे देश को एक नई राह दिखाई। यह एक वर्ष केवल कानून के क्रियान्वयन का नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, सम्मान और न्याय की नई संस्कृति के निर्माण का साक्षी रहा है।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि की जनता से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था। जनता के आशीर्वाद और समर्थन से सत्ता में आने के बाद, उन्होंने पहली ही कैबिनेट बैठक में इस संकल्प को निर्णय में बदल दिया। इसके बाद व्यापक जनसंवाद, विशेषज्ञों की समिति, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक औपचारिकताओं के माध्यम से 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पारित किया गया। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति महोदया की स्वीकृति मिलने के बाद, सभी नियमावली और प्रक्रियाएं पूरी कर 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत लागू कर दिया गया।

यह भी पढ़ें -  गणतंत्र दिवस के अवसर पर सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने सूचना भवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

यह ऐतिहासिक पहल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की उस भावना को साकार करती है, जिसकी परिकल्पना बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित संविधान निर्माताओं ने की थी। साथ ही, यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की राष्ट्रीय एकात्मता की सोच और पं. श्री दीनदयाल उपाध्याय जी के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने का सशक्त प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प से प्रेरित होकर उत्तराखंड ने यह सिद्ध किया है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं।

समान नागरिक संहिता का सबसे बड़ा प्रभाव महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के रूप में सामने आया है। यूसीसी के लागू होने से राज्य की बहन-बेटियों को हलाला, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है। यह गर्व का विषय है कि कानून के लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया है। यूसीसी ने महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा का मजबूत कानूनी आधार प्रदान करते हुए उन्हें समाज में सशक्त भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

यह भी पढ़ें -  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का वक्तव्य, एंजेल चकमा की नृशंस हत्या की घटना अत्यंत पीड़ादायक घटना।

यूसीसी के एक वर्ष के भीतर ही इसके सकारात्मक परिणाम आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पुराने अधिनियम के तहत जहां प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक तक पहुंच गई है। एक वर्ष से भी कम समय में 4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाह पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से सुरक्षित और सरल प्रक्रिया के तहत विवाह पंजीकरण करा सकते हैं, जिससे समय, संसाधन और मेहनत तीनों की बचत हो रही है।

यूसीसी ने न केवल विवाह पंजीकरण, बल्कि विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और उसके समापन जैसी सेवाओं को भी डिजिटल, पारदर्शी और सुगम बनाया है। बीते एक वर्ष में कुल 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरान निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। मजबूत साइबर सुरक्षा, फेसलेस सिस्टम और गोपनीयता आधारित प्रक्रिया ने नागरिकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

यह भी पढ़ें -  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जनकल्याणकारी अभियानों को मिल रही नई गति

मुख्यमंत्री धामी यह पहले ही साफ कर चुके हैं कि यह कानून किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज की कुप्रथाओं के खिलाफ है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों में “समानता से समरसता” स्थापित करना है, ताकि हर व्यक्ति को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान मिल सके।

यूसीसी की एक वर्ष की इस यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड ने केवल एक कानून लागू नहीं किया, बल्कि एक नई सामाजिक चेतना को जन्म दिया है। यह चेतना न्याय, समानता और गरिमा पर आधारित है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड आज एक ऐसे भविष्य की ओर अग्रसर है, जहां हर नागरिक को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त जीवन जीने का अवसर मिले और जहां समानता से समरसता तक का यह सफर पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बने।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page