गांधी की राह पर पुस्तक का हुआ विमोचन

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देहरादून 24 अप्रैल 2023।
पुस्तक गांधी की राह पर,,,, देहरादून 1919_1947 लेखक सुनील भट्ट
का विमोचन दून लाइब्रेरी मे हुआ।
विमोचन के बाद पुस्तक के बारे मे संजय कोठियाल ने बहुत महत्वपूर्ण चर्चा की फिर एस के दास ने अपना वक्तव्य दिया । पत्रकार व सुप्रीम कोर्ट मे एडवोकेट अनिल नौरिया ने अपने नाना महावीर त्यागी, सहित गांधी की दून मे उपस्थिति और बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किये। इस अवसर पर राज्य आन्दोलनकारी और जन कवि डॉ अतुल शर्मा ने भी अपने विचार रखे और स्वतंत्रता संग्राम में अपने पिता स्वर्गीय श्रीराम शर्मा के संस्मरणों को भी साझा किया।

लेखक सुनील भट्ट मे बताया कि इस पुस्तक क़ो युग वाणी ने किस्तों मे छाता और कई रोचक और आवश्यक जानकारी दी ।

रीच संस्था के लोकेश ओहरी ने पुरानी धरोहरों को बचाने पर बल दिया और गांधी विचारक बीजू नेगी ने खारा खेत और नेहरू के पत्र इन्दिरा क़ो का वाचन किया जिसे नेहरू ने देहरादून जेल यात्रा के दौरान लिखे थे ।

संचालन योगेश धस्माना ने किया ।नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इसमे शिरकत की ।
मेरा अनुभव यह रहा कि मै जिन नामो को बचपन से सुनता आया हूँ,,,, और जिन्हें अब लोग याद तक नही करते वह नाम और उनके काम सुनने को मिले तो यह मेरे लिये बहुत पारिवारिक आत्मिय अनुभव रहा ।

वे लोग जो देहरादून की पहचान रहे वे हमारे पिताजी महान स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रीय कवि श्रीराम शर्मा प्रेम के मित्र और कुछ अग्रज रहे थे और जो हमारे लिटन रोड स्थित किराये के मकान मे निरंतर आया करते थे ।

जिनमे से कुछ की तो हमे व हमारी रेखा दीदी और रंजना दीदी को याद है ।
यह घर साहित्य का केंद्र रहा ।
नामो मे महावीर त्यागी, खुर्शी लाल, अमीरचंद बंबवाल,हुलास वर्मा, आदि ।

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शहीद खड्ग बहादुर सिंह बिष्ट का गौरवशाली जिक्र हुआ और वीर चन्द्र सिह गढवाली व रासबिहारी बोस की चर्चा हुई ।साथ ही राजा महेन्द्र प्रताप के योगदान और देहरादून का उल्लेख हुआ । गांधीजी की परेड ग्राउंड मसूरी यात्रा व राजपुर मे उनके द्वारा पौधा रोपण और तिलक रोड मे बाल बनिता आश्रम की नीव का उनके द्वारा रखना उल्लेख मे आया और भी बहुत कुछ सार्थक चर्चा हुई ।

चौधरी बिहारी लाल, भक्त दर्शन, आदि के कार्यो का उल्लेख भी गरिमा मय में से हुआ ।
यह बेहद जरुरी कार्य क्म हुआ । दून लाइब्रेरी के चन्द्र शेखर तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया ।
भाई सुनील भट्ट ने मुझे पुस्तक इस लिए भेट की क्योकि इसमे हमारे पिताजी का उल्लेख है ।

जब उन्होंने 1946 मे सैन्ट्रलसैकेट्रिएट दिल्ली मे तिरंगा फहराते हुए गिरफ्तारी दी थी ।
स्वाधीनता संग्राम सेनानी एवं राष्ट्रीय कवि श्रीराम शर्मा प्रेम ने सन् 52 के इस पास साप्ताहिक हिन्दुस्तान मे खड्ग बहादुर सिंह बिष्ट पर एक लेख लिखा था जिसका उल्लेख भक्त दर्शन ने अपनी पुस्तक गढ़वाल की दिवंगत विभूतियां मे किया है ।

एम एन राय और पं विशंभरदत्त चन्दोला और प्रजामंडल आदि का भी जिक्र आया,,, और भी बहुत जानकारी लोगो को मिलीं ।
पुस्तक समय साक्ष्य प्रकाशन देहरादून से प्रकाशित हुई ।
जब यह पुस्तक प्रूफ देखने के लिये भट्ट जी के पास थी उस समय वे ओमप्रकाश जमलोकी के साथ बंजारा वाला मोनाल एंक्लेव से हमारे निवास पर आये थे ।

यहां लम्बी बात हुई थी ।
यह पुस्तक विभिन्न स्रोतो से तैयार ऐतिहासिक दस्तावेज के रुप मे प्रस्तुत की गयी है।

अमीरचंद बंबवाल का फ्रंटियर मेल धामा वाला से निकलता था बंबवाल जी के बाद उसे दत्ता जी निकालते थे । कुछ दिन मैने भी उसमे कार्य किया बंबवाल जी सरहदी गांधी खांन‌ अब्दुल गफ्फार खां के साथ थे और उनका कद और पोशाक भी वैसी ही थी ।

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ऐसे ही विश्वामित्र भाटिया भी ठीक वैसे ही लगते थे ।भाटिया साहब स्वाधीनता संग्राम सेनानी रहे है,,, पल्टन बाजार मे उनकी ऊन की दुकान थी और वे चकराता रोड मे रहते थे ।

खांन साहब शायद उन्ही के घर रहते थे । एक और व्यक्तित्व याद आये सरदार साधू सिंह सोज़
जिनका जिक्र वहां हुआ उसी से बहुत से स्वाधीनता संग्राम सेनानी याद आये,,, ।

गांधी जी जब परेड ग्राउंड मे आये तो उन्होंने महिलाओं से चंदा लिया जो पैर छूतीं उनसे वे एक आना ले लेते, जो दोनो पैर छूतीं उनसे दो आने लेते,,,, जनाधारित था स्वाधीनता संग्राम।

कांग्रेस पार्टी नही आन्दोलन था । उसके साथ आर्य समाज आदि मे कुरीतियों खिलाफ भी आन्दोलन होते रहे ।
क्रांतिकारी रास बिहारी बोस टैगोर विला मे रहते थे और एफ आर आई मे कार्य करते थे ।

एम एन राय दून जेल मे रहे और उन्हे मोहिनी रोड मे मकान एलोट हुआ । बाद मे उसकी देख रेख एस एन पुरी ने की ।

सन्‌70 के आसपास वहां मासिक विचार गोष्ठी होती थी,,,, हम सब उसमे जाते थे ।

क्रांतिकारी विरेंद्र पाडेय हमारे पारिवारिक मित्र थे ।वे अंडमान जेल मे रहे और उन्हे तनहाई मे बेड़ियों मे कस कर रखा गया था
वे भी याद आये । मसूरी मे तैयब जी रहते रहे जिनका यह प्रसंग तो समारोह मे भी आया कि उन्होंने स्वाधीनता संग्राम मे अमूल्य योगदान दिया और धरसाने के धावे मे उन्होंने नेतृत्व किया था।
यह पुस्तक मुझे अपने पिता के तमाम स्वाधीनता संग्राम सेनानी मित्रों की याद दिला गया।

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और भी बहुत बाते और संस्मरण याद आते रहे ।

दून लाइब्रेरी मे आयोजित इस समारोह का यह महत्व हुआ हमारे लिए और सब के लिए,,,,, /

मंगलान्द नौटियाल अभागा स्वाधीनता संग्राम सेनानी थे और उनका एक हाथ हैं बम से उड़ गया था,,,, वे कवि थे,,, और श्यामा देवी वत्स जी का चेहरा आंखो के सामने आया,,,,
याद आये स्वाधीनता संग्राम सेनानी व पत्रकार परिपूर्णानन्द पैन्यूली जी,,,, वे हमारे घर के पास ही रहते थे ( सुभाष रोड ) पर,,,,,

शहीद खड्ग बहादुर की बहुत गरिमामयी चर्चा हुई ।उनके परिवार से हमारा घनिष्ठ रिश्ता रहा ।

पिता जी द्वारा लिखे लेख और तत्कालीन मुख्यमंत्री संपूर्णान्द जी के माध्यम मे उनकी माता जी तुलसा देवी को पैंसठ रुपया पैंशन हुई उनकी बहन दुर्गा बिष्ट मुझे राखी बांधती रही थी ।

वे नेहरू ग्राम मे रहती थीं ।
ऐसे बहुत से चेहरे सामने लगातार आते रहे समारोह के बाद,,, ।

पुस्तक के बहाने नयी पीढ़ी क़ो जानकारी तो मिली पर हमे अपने पूर्वज स्मृति मे आये और सुख मिला । क्योंकि हमने अपने घर पर वह इतिहास जिया है,,,,
वह किराये का मकान भी किसी धरोहर से कम नही था । पर वह अब नही है।

हमारी अम्मा जी तब मसूरी प्रार्थना सभा मे थी जब वहा महात्मा गाँधी आये थे ।
और भी बहुत फिर से जी रहा हूँ इस पुस्तक की वजह से,,,,

सुभाष रोड की वह कुटिया ( किराये का मकान )
जहाँ रहते थे महान स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रीय कवि श्रीराम शर्मा प्रेम, यहां आते थे स्वाधीनता संग्राम सेनानी एवं साहित्य कार अब यह मकान नही है,,,,, चर्चा के बीच याद आया यह मकान,,,, जो गुम है।

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